वैवाहिक कार्यक्रम में सियासी तड़का-बरात से लेकर मंडप तक चुनावी बयार




आजमगढ़। 18वीं विधान सभा चुनाव के दो चरण के मतदान हो चुके है। इन दिनों सहालग का सीजन है। ऐसे में चुनाव की गर्मी वैवाहिक कार्यक्रम तक पहुंच गई है। यानी शादी में भी सियासी काकटेल चल रहा है। आलम यह है कि बरात से लेकर मंडप तक चुनावी बयार बह रही है। जयमाल के रस्म में भी दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी कैसी है, दुल्हन सुंदर है, सब अच्छा है के साथ ही इस पर भी चर्चा हो रही है कि आखिर सरकार किसकी बन रही है। राजनीतिक पार्टियों के साथ ही प्रत्याशी की भी चर्चा जोरों से हो रही है।

वैवाहिक कार्यक्रम में चुनावी बयार

आइए यहां इसका उदाहरण भी देखते हैं। अंधेरी रात में जगमगाती रोशनी। डीजे की धुन पर थिरकते कदम और गुनगुनाते होंठ। बारात गेस्ट हाउस पर पहुंची तो कार चालक ने तुरंत हाथ आगे बढ़ा दिया। सौ की नोट मिली मगर गेट नहीं खोला। बोला- खुशी के मौके पर कंजूसी ठीक नहीं, महंगाई बढ़ गई है। ससुराल पक्ष के युवकों ने जैसे ही दूल्हे को कंधे पर बैठाया, नोटों की बौछार होने लगी। अब मंहगाई के साथ कमाई बढ़ी, यह भी दिख गया। धीरे-धीरे सभी बाराती गेस्ट हाउस के भीतर पहुंच गए और नाश्ते की प्लेट उठाते हुए डेकोरेशन देख बदलाव महसूस किया।

द्वारचार पर भी राजनीतिक चर्चा

भीनी-भीनी खुशबू के बीच सभी इस पल का अपने-अपने तरीके से आनंद उठा रहे थे। तभी आवाज सुनाई दी तो ब्लेजर को ठीक करते हुए एक बराती द्वारचार पर पहुंचा। इशारा मिलते ही कहा- पंडितजी विधि विधान के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ाते रहिए, सरकार हमारी है, चिंता की बात नहीं है। यह बात एक बुजुर्ग ने लपक ली और इतिहास के झरोखे से जुबानी आंकड़ा निकालकर कहा, प्रदेश में कोई दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बना है। विकास हुआ है लेकिन रोजगार भी जरूरी है। तभी एक शालीन महिला ने दूसरे को पर्स थमाते हुए कहा, संभालकर रखना चोरी हो सकता है। सीसीटीवी भी लगा है, चोर कहां जाएगा भागकर। पुलिस जल्दी पकड़ लेगी। यह कहते हुए दूसरी महिला ने आशंका को कमजोर किया।

युवाओं में भी चुनावी चर्चा

उधर, फ्लोर डीजे पर डांस कर रहे युवाओं की टोली ने कहा सरकार बदल दो। संचालक समझा नहीं, तो गाना बदलने को फिर बोला। तब तक बुजुर्ग चाचा के गर्म रसगुल्ले वाली प्लेट पर भतीजे ने ठंडी आइसक्रीम रख दी। नाराजगी बढ़ती, इससे पहले शादी में सियासी काकटेल हो गया।

देर रात तक होते रहे मुद्दों पर तर्क-कुतर्क

चर्चा शुरू हुई तो महिला, बुजुर्ग, युवा सभी शामिल हो गए। विकास, अपराध, कानून-व्यवस्था, माफिया, महिला हिंसा, किसान, रोजगार जैसे तमाम मुद्दों पर तर्क-कुतर्क होने लगे। बरात से लेकर मंडप तक चुनावी बयार बहने लगी। दूल्हा-दुल्हन से ज्यादा पार्टी और प्रत्याशी की चर्चा हो रही थी। तभी एक बच्ची ने कहा, मम्मी जयमाल होने जा रहा है। सभी वहां पहुंचे और तालियों के बीच रस्म पूरी हुई। इसी बीच एक प्रगतिशील विचारधारा के समर्थक स्टार्टअप शुरू करने वाले ने चुहलबाजी की- दुल्हन तो सुंदर है, मगर सरकार किसकी बन रही है। यह सुन ठहाके लगे और फिर चुनावी चर्चा शुरू हो गई।

Post a Comment

0 Comments