परिजनों का आरोप 50 हजार दो तभी मिलेगा शव
लखनऊ। राजधानी के गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बलिया जनपद के एक मरीज की मौत हो गई। परिवारीजनों का आरोप है कि मौत के बाद बिल बढ़ाने के लिए शव को बेड पर लिटाए रखा गया। परिवारीजन जब वार्ड में जबरन दाखिल हुए तो मरीज का शव देखा। शव काला पड़ा चुका था। परिजन शव ले जाने लगे तो स्टॉफ ने बकाए 50 हजार रूपए भुगतान मांगा। भुगतान के अभाव में शव देने से इनकार कर दिया। जिससे नाराज परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस शव दिलाकर कर शांत कराया।
मरीज के मौत के बाद भी चलता रहा इलाज
मिली जानकारी के अनुसार जनपद बलिया निवासी तपेश्वर यादव (80) को उसके परिवार के लोग रविवार को बेहोशी की हालत में लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बेड खाली न होने की बात कर पीजीआई ले जाने की सलाह दी। लेकिन एम्बुलेंस के दलाल ने मरीज को गोमतीनगर के निजी अस्पताल में लेकर चले गए। मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया। इस संबंध में बेटे अजय यादव का आरोप है अस्पताल के कर्मचारियों ने दोपहर बाद से मरीज से मिलने नहीं दिया। शाम को विरोध करने बाद परिजन आईसीयू में पहुंचे, तो देखा मरीज को सांस नहीं चल रही थी। शरीर भी काला पड़ चुका था। बेटे ने बताया 24 घंटे के इलाज दौरान करीब सवा लाख रुपए वसूल लिए गए।
50 हजार बकाया भुगतान दो तभी मिलेगा शव
आरोप है कि अस्पताल कर्मचारियों ने 50 हजार बकाया भुगतान जमा करने को कहा तभी शव मिलेगा मांगा। परिवारीजनों ने मौत बाद भी शव लिटाए रखने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। जिसे लेकर स्टॉफ भड़क उठे। स्टॉफ-परिजन भिड़ गए। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। मामले की सूचना पाकर आई पुलिस ने शव दिलवाया। परिजनों ने सीएमओ को शिकायत पत्र भेजा है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिवारीजनों ने सिर्फ 10 हजार रुपये जमा किए थे। तीमारदारों ने पहले महिला स्टॉफ से मारपीट किया था।
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