दलबदल के माहिर खिलाड़ी रहे आजमगढ़ के दारासिंह चौहान

कांग्रेस से राजनैतिक पारी का शुभारंभ, बसपा से सपा होते हुए बने थे भाजपाई, अब सपा से मुख्तार के गढ़ में दावे लगाने की तैयारी




Mj Vivek
आजमगढ़। कयास सच साबित हुए और अंततः चुनावी बिगुल बजते ही दल बदल खेल के माहिर खिलाड़ी प्रदेश सरकार के पर्यावरण व वनमंत्री दारासिंह चौहान ने पद से त्यागपत्र दे दिया। भाजपा से उनका मोहभंग होेने के कयास अक्टूबर से ही लग रहा था उनके ही विधान सभा में 04 जनवरी को प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा के जनसंवाद कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति से इन कयासों को बल मिला। इसके बाद तो उनके सपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गई। उनके मुख्तार अंसारी की पुरानी सीट घोसी से लगने की चर्चा तेज हो गई है।

डीएवी महाविद्यालय से छात्रसंघ चुनाव में उतरे

आजमगढ़ के गेलवारा में सामान्य परिवार में 25 जुलाई 1963 को पैदा हुए दारासिंह चौहान ने छात्र जीवन से ही राजनीति का शुभारंभ किया है। अस्सी के दशक में आजमगढ़ के डीएवी महाविद्यालय से छात्रसंघ चुनाव में उतरे पर सफल नहीं हुए। स्नातकोत्तर के बाद इन्होंने कांग्रेस से अपनी राजनैतिक पारी शुभारंभ किया। बाद में बसपा सुप्रीमो के निकट में आ गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 1996 में राज्यसभा से त्याग पत्र दिया एवं पद रिक्त होने के बाद हुए चुनाव में उन्हें राज्यसभा कर उम्मीदवार बनाया। वह चुनाव जीत गए। 1996 से 1999 तक बसपा से राज्यसभा के सांसद रहे। 1999 में इनकी निष्ठा बदली और बसपा को अलविदा कह दिया। 1999 में लाल टोपी धारण किया। सपा उन्हें तेरहवीं लोकसभा के चुनाव मैदान में उतारा लेकिन 1,68,747 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव में मिली पराजय के बाद लगे जख्म पर सपा ने मरहम लगाया और वह वर्ष 2000 से 2006 तक राज्यसभा सदस्य रहे।

बसपा ने बनाया नेता प्रतिपक्ष 

सदस्यता समाप्त होने के बाद उनकी कांग्रेस के प्रति लगाव हो गया। लेकिन यह लगाव कुछ माह में ही भंग हो गया। और वे बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। बसपा ने इन्हें वर्ष 2009 में 15वीं लोकसभा के लिए घोसी से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में 2,20,695 मत पाकर विजयी हुए। बसपा ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा से किस्मत आजमाया और बीते चुनाव की अपेक्षा 13 हजार अधिक मत मिलने के बावजूद भाजपा के हरिनाराणन राजभर ने करीब डेढ़ लाख मतों से हरा दिया। इस हार के कारण उनका बसपा से मोहभंग हो गया। लेकिन दल बदल के माहिर खिलाड़ी ने राजनैतिक वातावरण का पूर्वानुमान लगाते हुए भाजपा का दामन थामा लिया और मधुबन से विधायक बन योगी सरकार में पर्यावरण व वनमंत्री बन गए।

मुख्तार के गढ़ में दावे लगाने की तैयारी में दारा

भाजपा से विधायक दारासिंह चौहान ने सोची समझी रणनीति के तहत भाजपा से इस्तीफा दिया है। वह अब मुख्तार अंसारी की घोसी सीट से लड़ने की तैयारी में है। सपा के टिकट से अगर वह इस सीट से लड़ते है तो उनकी जीत एकदम पक्की है। वहीं सपा भी मुख्तार अंसारी की आपराधिक छबि से दूर रहने के लिए इन्हें टिकट दे सकती हैं। वहीं इनकी वर्तमान सीट मधुबन भी सपा के झोली में जा सकती है। पर जातिगत समीकरणों के हिसाब से उनके लिए घोसी ज्यादा सुरक्षित दिख रही है। मधुबन सीट से वह 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट से जीते थे। सही मायने में दारासिंह ने क्षेत्र में अपने प्रभाव से भाजपा को जिताया था। यहां पहली बार भाजपा को जीत मिली थी। सपा को राजभर का साथ मिलने पर अब इस सीट पर गुणा-भाग बदल सकते है। इस सीट पर दलित मतदाता सबसे ज्यादा है दूसरे नंबर पर यादव आते है। अखिलेश और राजभर के गठजोड़ के बाद राजभर-यादव को मिलाकर देखें तो यह आकड़ा 84 हजार पहुंच जाता हैं। ऐेसे में अगर चौहान और मुस्लिम वोटर भी साथ देते है तो सपा से लड़ने वाले उम्मीदवार की जीत पक्की है। दारासिंह के पास 25 हजार चौहान वोटर भी है जो उनके खाते में पिछली बार की तरह ही साथ दे सकते हैं। जीत पक्की करने के लिए वह राह बदलते नजर आ रहे है।

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