लखनऊ। मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजित करने और गांवों के विकास का रिकार्ड बनाने के बावजूद प्रदेश के पश्चिमी हिस्से के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में मनरेगा का योगदान नहीं के बराबर है। मजदूरी कम होने से इस जिलों में मनरेगा में मजदूर मिल ही नहीं रहे हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर मांग की है कि हरियाणा और पंजाब की तरह विकसित पश्चिमी यूपी के जिलों में मनरेगा मजदूरी की दरें बढ़ाई जाएं।
अगर केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूर किया तो पश्चिमी यूपी में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को 280 रुपये की दर से पारिश्रमिक मिलने लगेगा। अभी पश्चिमी यूपी में उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र सरकार से तय 204 रुपये पारिश्रमिक ही दी जाती है। ग्राम्य विकास विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह “मोती सिंह” और अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार से राज्य में खासकर पश्चिमी यूपी में मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ाने की मांग की गई है। इस मुद्दे पर ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारियों से बातचीत भी की जा रही है।
अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार के मुताबिक पश्चिमी यूपी के करीब 15 जिले जिसमें गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, सहारनपुर, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर आदि शामिल हैं में मनरेगा का काम नहीं के बराबर है। गाजियाबाद में पिछले चार साल से एक भी मजदूर नहीं हैं। नोएडा में गिनती के मजदूर हैं। बागपत, सहारनपुर आदि जिलों में भी कमोवेश यही हाल है। वहीं सूत्र बताते हैं कि पश्चिमी यूपी के कुछ जिले तो ऐसे हैं जहां पर मनरेगा मजदूरों के नहीं होने से मनरेगा के स्टाफ तक नहीं रखे गए हैं।
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