काशी में 2015 के मुकाबले अब पर्यटकों की संख्या हुई दुगनीः मोदी



वाराणसी। काशी दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वर्वेद महामंदिर में विहंगम योग के 98वें वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि इच्छा शक्ति हो तो परिवर्तन संभव है। बनारस को देश को नई दिशा देने वाला शहर बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके विकास का सकारात्मक असर यहां आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है। 2014-15 के मुकाबले में 2019-20 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2019-20 कोरोना कालखंड में अकेले बाबतपुर एयरपोर्ट से ही 30 लाख से ज्यादा लोगों का आना-जाना हुआ है। बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान के, कला के, उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है। आज जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं, तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप भी बनता है।

रिंग रोड का काम भी काशी ने रिकार्ड समय पर पूरा किया है। बनारस आने वाली कई सड़कें भी अब चौड़ी है गई हैं। जो लोग सड़क के रास्ते बनारस आते हैं, वो सुविधा से कितना फर्क पड़ा है, इसे अच्छे से समझते हैं। मैं जब काशी आता हूं या दिल्ली में भी रहता हूं तो प्रयास रहता है कि बनारस में हो रहे विकास कार्यों को गति देता रहूं। कल रात 12 बजे के बाद जैसे ही मुझे अवसर मिला, मैं फिर निकल पड़ा था अपनी काशी में जो काम चल रहे हैं, जो काम किया गया है, उनको देखने के लिए। गौदोलिया में जो सुंदरीकरण का काम हुआ है, देखने योग्य बना है। मैंने मडुवाडीह में बनारस रेलवे स्टेशन भी देखा। इस स्टेशन का भी अब कायाकल्प हो चुका है। पुरातन को समेटे हुए नवीनता को धारण करना, बनारस देश को नई दिशा दे रहा है। स्वाधीनता संग्राम के समय सद्गुरु ने हमें स्वदेशी का मंत्र दिया था। आज उसी भाव में देश ने अब ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ शुरू किया है। आज देश के स्थानीय व्यापार-रोजगार को, उत्पादों को ताकत दी जा रही है, लोकल को ग्लोबल बनाया जा रहा है। हमारा गौ-धन हमारे किसानों के लिए केवल दूध का ही स्रोत न रहे, बल्कि हमारी कोशिश है कि गौवंश प्रगति के अन्य आयामों में भी मदद करे। आज देश गोबरधन योजना के जरिए बायो-फ्यूल को बढ़ावा दे रहा है, आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दे रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज आप सभी से कुछ संकल्प लेने का आग्रह करना चाहता हूं। ये संकल्प ऐसे होने चाहिए जिसमें सद्गुरु के संकल्पों की सिद्धि हो और जिसमें देश के मनोरथ भी शामिल हों। ये ऐसे संकल्प हो सकते हैं जिन्हें अगले दो साल में गति दी जाए, मिलकर पूरा किया जाए। एक संकल्प ये हो सकता है- हमें बेटी को पढ़ाना है, उसका स्किल डेवलपमेंट भी करना है। अपने परिवार के साथ साथ जो लोग समाज में जिम्मेदारी उठा सकते हैं, वो एक दो गरीब बेटियों के स्किल डेवलपमेंट की भी जिम्मेदारी उठाएं। एक और संकल्प हो सकता है पानी बचाने को लेकर। हमें अपनी नदियों को, गंगा जी को, सभी जल स्रोतों को स्वच्छ रखना है।

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