हाता परिवार के दम पर ब्राह्मणों को साधने की जुगत में अखिलेेश

हरिशंकर तिवारी के कुनबे में सपा में शामिल करा भाजपा-बसपा को दिया करारा झटका



गोरखपुर। पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मणों के नेता बनकर उभरे बाहुबली हरिशंकर तिवारी के दोनों बेटों और भांजे को पार्टी में शामिल कराकर सपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तरफ बसपा को तगड़ा झटका दिया है तो दूसरी ओर भाजपा के लिए भी कुछ मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अखिलेश यादव पूर्वांचल में हाता परिवार से ब्राह्मणों को साधने की जुगत में हैं। पूर्वांचल के ब्राह्मण समाज में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी की अच्छी पैठ मानी जाती है। उन्हें कभी ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता था। यही वजह है कि सरकारें किसी भी दल की बनती थीं, उनका का मंत्री बनना तय होता था। वर्ष 2007 में राजेश त्रिपाठी से चुनाव हारने के बाद हरिशंकर तिवारी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। अब उनकी विरासत को छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी ने संभाल रखा है।

वर्ष 2017 में जब भाजपा की प्रचंड लहर थी, उस समय हाता परिवार ने अपना दमखम दिखाया और चिल्लूपार विधानसभा सीट से विनय शंकर चुनाव जीत गए। वहीं, हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी संतकबीरनगर संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुके हैं। जबकि, गणेश शंकर पांडेय गोरखपुर-महराजगंज से स्थानीय निकाय का चुनाव चार बार जीत चुके हैं। बसपा की सरकार में वे विधान परिषद के सभापति बनाए गए थे। तीनों नेता अभी तक बसपा में थे, लेकिन इनके सपा में जाने के चर्चा से बसपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हरिशंकर तिवारी के परिवार को यूं ही सपा में शामिल होने पर सहमति नहीं जताई है। इसके पीछे तिवारी परिवार के प्रभाव को भी देखा है। सपा इसी का फायदा उठाने की कोशिश में जुटी है। पूर्वांचल की रैलियों में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर विनय शंकर तिवारी और गणेश शंकर पांडेय को मंच पर लाने की तैयारी है। सपा नेतृत्व, गोरखपुर और बस्ती मंडल की 41 सीटों पर इनकी सभाएं करा सकता है। हाता परिवार करीब 14 साल बाद एक बार फिर साइकिल की सवारी करने जा रहा है। वर्ष 2007 में जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, तब हरिशंकर तिवारी लोकतांत्रिक कांग्रेस के अध्यक्ष थे। सहयोगी दल के रूप में सरकार में शामिल हुए और कैबिनेट मंत्री बने थे। गणेश शंकर पांडेय ने सपा की सदस्यता ली थी और स्थानीय निकाय का चुनाव सपा से लड़कर जीते थे।

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