लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद तस्वीर साफ हो गई। दो निर्दलीय प्रत्याशियों कंते सयन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया का नामांकन विधायकों का आवश्यक समर्थन न होने और अन्य खामियों के चलते रद कर दिया गया। इसके बाद अब भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशियों के पर्चों की बुधवार को जांच की गई। भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के अलावा दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी नामांकन दाखिल किया था। इनमें हैदराबाद निवासी कंते सयन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया शामिल थे। जांच के दौरान दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन में आवश्यक समर्थन और अन्य औपचारिकताओं से जुड़ी कमियां पाई गईं, जिसके आधार पर उनके पर्चे खारिज कर दिए गए।
अब मैदान में 10 प्रत्याशी
दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन रद होने के बाद राज्यसभा की 10 सीटों के लिए अब 10 ही प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। ऐसे में सीटों की संख्या और प्रत्याशियों की संख्या बराबर होने के कारण सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नौ अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जबकि 16 अक्टूबर को मतदान होना निर्धारित है। हालांकि प्रत्याशियों की संख्या सीटों के बराबर रह जाने से मतदान की नौबत नहीं आने की स्थिति बन गई है।
भाजपा के आठ, सपा के दो प्रत्याशी
भाजपा की ओर से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार मैदान में हैं। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है। अब नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

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