रामजन्म से रावण वध तक का मंचन
विद्यार्थियों ने रामजन्म, गुरुकुल शिक्षा, ताड़का वध, सीता स्वयंवर, राम विवाह, वनगमन, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण, हनुमान मिलन, लंका दहन, रावण वध और अयोध्या वापसी सहित कई प्रसंगों का मंचन किया। आकर्षक वेशभूषा, मुकुट, साज-सज्जा, आधुनिक लाइट-साउंड सिस्टम और डिजिटल पृष्ठभूमि ने प्रस्तुतियों को प्रभावशाली बनाया।
अतिथियों ने विद्यार्थियों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य विनय पांडेय ने सभी अतिथियों और आयोजन में सहयोग देने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रामलीला का उद्देश्य मनोरंजन के साथ विद्यार्थियों में धैर्य, अनुशासन, आज्ञाकारिता और असत्य पर सत्य की जीत जैसे नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने सभी को दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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