‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ मार्च के दौरान आजमगढ़ तिराहे पर पुलिस से हुई खींचतान, सीसी कैमरों से आरोपितों की पहचान में जुटी पुलिस
मऊ। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पांच अक्टूबर को निकाले गए ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ मार्च के दौरान हुए हंगामे के मामले में कोतवाली नगर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुतला जलाने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई खींचतान में चार उपनिरीक्षक और एक कांस्टेबल के हाथ झुलस गए थे। मामले में भीटी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक राजेश कुमार की तहरीर पर पुलिस ने सपा नेता समेत आठ नामजद और करीब 400 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और सीसी कैमरों के माध्यम से अन्य आरोपितों की पहचान में जुटी है।
सपा, कांग्रेस और माकपा के संयुक्त तत्वावधान में पांच अक्टूबर को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ संदेश के साथ पैदल मार्च निकाला गया था। प्रदर्शनकारी जीवनराम छात्रावास मैदान से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए थे।
पुतला छीनने में झुलसे पुलिसकर्मी
जुलूस के आजमगढ़ तिराहे पर पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला निकाला और उसे आग लगाने का प्रयास किया। पुलिस ने पुतला अपने कब्जे में लेने के लिए हस्तक्षेप किया। इसी दौरान दोनों पक्षों में खींचतान हुई और पुतले में लगी आग की चपेट में आने से पांच पुलिसकर्मी झुलस गए। झुलसने वालों में उपनिरीक्षक राजेश कुमार, संजय कुमार तिवारी, योगेंद्र सिंह, अंबरीश कुमार पांडेय और कांस्टेबल राहुल शामिल हैं। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए पुतला अपने कब्जे में ले लिया।
इसके बाद प्रदर्शनकारी गाजीपुर तिराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी कार्यालय के पास पहुंचे। पुलिस के अनुसार, यहां भी पुतला जलाने और पुलिस के कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया। पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोककर स्थिति नियंत्रित की।
आठ नामजद, फुटेज से होगी पहचान
प्राथमिकी में सपा नेता मयंक पांडेय के अलावा अजय यादव उर्फ प्रियांशु, शाहनवाज आलम, रवि प्रकाश, अखिलेश भारती, आशीष यादव, देवेंद्र पांडेय उर्फ सत्यम और अमरनाथ उर्फ भोलू पंडित को नामजद किया गया है। इनके अलावा करीब 400 अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है।
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के तिराहों-चौराहों पर लगे सीसी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, वीडियो, फोटो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपितों की पहचान की जाएगी। मार्च को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक, सीओ सिटी, अपराध निरीक्षक समेत कई उपनिरीक्षकों और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भी मौजूद थे।
जुलाई के प्रदर्शन का भी दिया हवाला
पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई को भी सपा नेता मयंक पांडेय और उपाध्यक्ष उर्फ सोनू पंडित समेत 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस समय सपा कार्यकर्ताओं ने बाल निकेतन से गाजीपुर तिराहा होते हुए कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला था। आरोप है कि गाजीपुर तिराहे पर कैबिनेट मंत्री एके शर्मा के बैनर को फाड़ा गया था। भाजपा के झंडे के साथ कथित अभद्रता का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा युवा मोर्चा के महामंत्री की शिकायत पर भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
सीओ सिटी मऊ नितेश प्रताप सिंह ने बताया कि पांच अक्टूबर के प्रदर्शन में पुतला जलाने की कोशिश के दौरान चार उपनिरीक्षक और एक कांस्टेबल झुलसे हैं। वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों के आधार पर अन्य आरोपितों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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