अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में नाम को लेकर उठाए थे सवाल, प्रशासन का दावा—हिंदी में एक नाम वाले सभी 10 मतदाता अलग-अलग व्यक्ति
आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर उठाए गए सवालों के बीच आजमगढ़ जिला प्रशासन ने अपना पक्ष जारी किया है। सदर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता विकास यादव के नाम को लेकर उठे विवाद पर जिला सूचना कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि ईआरओनेट (ERONet) पर हिंदी में ‘विकास यादव’ नाम के 10 मतदाता प्रदर्शित हो रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में ये सभी अलग-अलग व्यक्ति पाए गए हैं, जो वर्तमान में संबंधित गांवों में निवास कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आजमगढ़ की मतदाता सूची में विकास यादव के नाम को लेकर सवाल उठाए थे। उनके दावे के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया। अब जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर चल रही जांच के संबंध में प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि हिंदी में नाम एक समान होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम 10 जगह दर्ज है।
अंग्रेजी नाम, फोटो और दस्तावेजों का किया गया मिलान
जिला सूचना कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस प्रकरण में मीडिया के कई प्रतिनिधियों ने जिला निर्वाचन अधिकारी का बयान मांगा था। इसके बाद प्रशासन की ओर से जांच की जानकारी साझा की गई।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान ईआरओनेट पर हिंदी में ‘विकास यादव’ नाम से दर्ज सभी 10 मतदाताओं के अन्य विवरणों का मिलान किया गया। इसमें अंग्रेजी में दर्ज नाम, फोटो और अन्य उपलब्ध जानकारियों को शामिल किया गया।
इसके अलावा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान संबंधित मतदाताओं की ओर से दिए गए पहचान पत्रों और अन्य अभिलेखों की भी जांच की गई। प्रशासन के अनुसार, इन दस्तावेजों को संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने उस समय ईआरओनेट पर अपलोड किया था और वे रिकॉर्ड अब भी पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
गांवों में भेजी गई टीम, स्थलीय सत्यापन भी
प्रशासन ने केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर ही निष्कर्ष नहीं निकाला, बल्कि संबंधित गांवों में टीम भेजकर स्थलीय सत्यापन भी कराया। विज्ञप्ति के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य विवरणों के मिलान के बाद मौके पर जांच की गई। इस प्रक्रिया में पाया गया कि हिंदी में एक समान नाम वाले सभी 10 मतदाता अलग-अलग व्यक्ति हैं और वर्तमान में गांवों में रह रहे हैं।
इस आधार पर प्रशासन ने उस दावे पर सवाल खड़ा किया है कि हिंदी में एक ही नाम 10 जगह दिखाई देने का मतलब एक ही व्यक्ति का नाम कई स्थानों पर दर्ज होना है। हालांकि, मतदाताओं के हिंदी नामों में एक जैसी प्रविष्टि होने की वजह क्या है, इस बिंदु पर जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
नाम की विसंगति पर जांच जारी
जिला सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित मतदाताओं के हिंदी नामों में पाई गई विसंगति की जांच अभी जारी है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की जानकारी दी जाएगी।
इससे साफ है कि प्रशासन ने फिलहाल सभी 10 मतदाताओं के अलग-अलग व्यक्ति होने की बात कही है, लेकिन हिंदी नामों में समानता के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। ऐसे में जांच की अंतिम रिपोर्ट इस विवाद के शेष पहलुओं को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच रिपोर्ट पर नजर
मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ी का मुद्दा चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़ा है। अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आया, जबकि जिला प्रशासन ने दस्तावेजी मिलान और स्थलीय सत्यापन के आधार पर अपना पक्ष रखा है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में यह अंतर महत्वपूर्ण है कि एक ही नाम के 10 मतदाता मिलना और एक ही व्यक्ति का नाम 10 स्थानों पर दर्ज होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच में संबंधित मतदाता अलग-अलग व्यक्ति पाए गए हैं। वहीं, नामों की विसंगति की विस्तृत जांच जारी है।
अब सभी की नजर उप जिला निर्वाचन अधिकारी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंदी नामों में समानता किस वजह से दर्ज हुई और रिकॉर्ड में सुधार की आवश्यकता है या नहीं।
स्रोत: जिला सूचना कार्यालय, आजमगढ़ की ओर से जारी विज्ञप्ति।

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