आजमगढ़। विकसित भारत संकल्प यात्रा वैन के शुभारंम और निर्माणाधीन महाराजा सुहेलदेव विश्व विद्यालय के निरीक्षण के लिए जनपद पहुंचे सीएम योगाी आदित्य नाथ के कार्यक्रम में उस समय गहमा-गहमी का माहौल बन गया जब जिले के कुछ वरिष्ठ नेताओं को बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली तो वहीं पर जमीन पर बैठ गए। तभी किसी ने इस वाक्या का विडियो बना कर वायरल कर दिया कि नाराज भाजपाई धरने पर बैठे है। जबकि इस विषय पर बोलने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ की क्यों वे जमीन पर बैठे है। दरअसल, गुरूवार को जिले के जहानागंज विकास खंड के अकबेलपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ विकसित भारत संकल्प यात्रा वैन का शुभारंभ व निर्माणाधीन महाराजा सुहेलदेव विश्व विद्यालय के प्रगति का निरीक्षण करने के लिए आए थे। इस कार्यक्रम का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश राय, सीता चौहान, अजय सिंह, महेन्द्र मौर्या सहित दर्जनों नेता जमीन पर बैठे हुए है। और कुर्सी न मिलने के कारण विरोध रूवरूप प्रदर्शन कर रहे है। हालांकि एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि धरने जैसे कोई बात नहीं है। दरअसल, मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए करीब 30 लोगों के नाम की सूची बनाई गई थी। जबकि सीएम के कार्यक्रम होने के कारण लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी और लगभग सभी कुर्सियां भर चुकी थी। इसलिए कुछ लोग वहीं कालीन पर बैठ गए। इस दौरान कुछ लोग प्रशासन को कम कुर्सियों के लिए जरूर कोस रहे थे।
मंच पर सीएम योगी से लगाई आवास की गुहार
विकसित भारत संकल्प यात्रा वैन के माध्यम से केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ पात्रों को मिलने का दावा करने की कलई उस समय खुल गई जब विकास खंड जहानागंज के अकबेलपुर पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने ही एक महिला ने आवास न मिलने की आवाज बुलंद की। उस महिला की पीड़ा सुनकर सीएम से लगायत वहां उपस्थित सभी उच्चाधिकारी भी चकित हो गए। दरअसल, प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ गुरूवार को विकसित भारत संकल्प यात्रा वैन का शुभारंभ करने के लिए जनपद के जहानागंज विकास खंड के अकबेलपुर पहुंचे थे। मंच पर महिलाओं को परिवार कैसे चलाते है बताने के लिए बुलाया गया था। मंच पर पहुंची विकास खंड जहानागंज की सोनापुर निवासी उर्मिला ने सीएम योगी से कहा कि कई बार प्रधान से गुहार लगाने के बाद भी आज तक आवास का पैसा नहीं मिला। उर्मिला का कहना है कि मेरे पति का एक्सीडेंट हो गया है सास-सुसर नहीं है सामुुदायिक शौचालय में काम कर किसी तरह परिवार तो चला लेती हूं। लेकिन आवास नहीं बना पाई हूं। बरसात के दिनों में रात भर बैठ कर गुजारती हूं। मेरे छोटे-छोटे बच्चे है। प्रधान से आवास के लिए गुहार लगाई तो उन्होंने कहा कि मड़ई डाल लो तो आवास का पैसा मिलेगा। अब जब मड़ई बना लिया। फिर गई तो कहे की तुम्हारे पास ईट है मकान बना लो। जबकि वह ईट पुश्तैनी है जो मुझे अभी तक नहीं मिली है।


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