योगी सरकार का बड़ा फैसला..आजमगढ़ सहित इन जिलों में नई टाउनशिप की प्लानिंग!


लखनऊ। अगर आप आजमगढ़, वाराणसी सहित राज्य के दर्जनभर शहरों में एक अदद आशियाना उचित दाम पर चाहते हैं तो थोड़ा और इंतजार करिए। योगी सरकार प्रदेश के कई छोटे-बड़े शहरों में नई टाउनशिप विकसित करने के लिए संबंधित विकास प्राधिकरणों की वित्तीय मदद करने जा रही है। पहले-पहल उन प्राधिकरणों को टाउनशिप के लिए भूमि अर्जन पर आने वाले खर्चे का 50 प्रतिशत तक सरकार देगी जिनके पास वर्तमान में बिल्कुल जमीन नहीं है।

दरअसल, राज्य के 33 विकास प्राधिकरण और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में से 12 ऐसे हैं, जिनका लैंड बैंक पूरी तरह से खाली है। मतलब यह है कि उनके पास जरूरतमंदों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए आवासीय कालोनी विकसित करने को एक इंच भी जमीन नहीं है। चूंकि ज्यादातर प्राधिकरण वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं इसलिए किसी के पास भूमि अर्जित करने के लिए पैसे भी नहीं हैं। ऐसे में योगी सरकार ने नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित व सुव्यवस्थित विकास के साथ-साथ शहरी आबादी को आवासीय सुविधा मुहैया कराने के मद्देनजर मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण / नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत नई टाउनशिप विकसित करने के लिए प्राधिकरणों को वित्तीय मदद देने का निर्णय किया है। प्राधिकरणों को भूमि अर्जन में आने वाले खर्च के 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए देने की व्यवस्था सरकार ने की है। योजना के तहत पिछले दिनों गोरखपुर, चित्रकूट, अलीगढ़, आगरा, बुलंदशहर, बरेली, झांसी में नई टाउनशिप विकसित करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये देने के बाद सरकार अब दर्जनभर और शहरों में भी नई टाउनशिप के लिए तीन हजार करोड़ रुपये देने की तैयारी में है।

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के मंत्री पद का भी दायित्व संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हाल ही में हुई बैठक में उन प्राधिकरणों को प्राथमिकता पर वित्तीय मदद देने का निर्णय किया गया जिनका लैंड बैंक शून्य है। विभाग द्वारा ऐसे सभी प्राधिकरणों से नई टाउनशिप विकसित करने संबंधी प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विकास प्राधिकरणों का लैंड बैंक शून्य है उनमें वाराणसी, अयोध्या, सहारनपुर, मीरजापुर, रायबरेली, रामपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, कपिलवस्तु, फिरोजाबाद, बस्ती, बागपत हैं। छह प्राधिकरण के पास नियोजन के लिए दस हेक्टेयर से भी कम ही जमीन है। इनमें बांदा प्राधिकरण के पास 0.88 हेक्टेयर, कुशीनगर में 0.97, आजमगढ़ में 1.04, उरई में 1.41, खुर्जा में 2.69 और प्रयागराज विकास प्राधिकरण के पास मात्र 8.64 हेक्टेयर जमीन ही बची है। 

इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, आवास एवं नियोजन विभाग नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया कि शहरों में नई टाउनशिप विकसित करने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण / नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत अब उन विकास प्राधिकरणों को प्राथमिकता पर वित्तीय मदद देने का निर्णय किया है जिनका लैंड बैंक शून्य है। अयोध्या, वाराणसी सहित कई शहरों के प्राधिकरणों के पास नियोजन के लिए जरा भी भूमि नहीं है। ऐसे प्राधिकरणों को भूमि अर्जन पर आने वाले खर्चे का 50 प्रतिशत तक सरकार सीड कैपिटल के तौर पर देगी ताकि संबंधित शहरों में भी नई टाउनशिप विकसित हो सके।

Post a Comment

0 Comments