गोरखपुर। जिले में सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां एक शख्स ने अपनी ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव के टुकड़े कर सूटकेस में भर दिए। सूटकेस को बगल वाली चाय की दुकान में छिपा दिया। दरअसल, बैंक का कर्ज चुकाने के लिए पिता ने पैसे देने से इनकार किया तो शख्स ने सिर पर सिल-बट्टा मारकर हत्या कर दी। इसके बाद गर्दन को चाकू और फिर आरी से काटकर अलग कर दिया। शव के टुकड़े करके उसे सूटकेस में भरकर घर के बगल की गली में चाय की दुकान में छिपा दिया।
वारदात शनिवार की रात तिवारीपुर इलाके के सूर्य विहार आवास विकास कॉलोनी में हुई। मधुर मुरली गुप्ता (62) का बड़ा बेटा प्रिंस बैंक का 40 हजार कर्ज देने के लिए पैसे मांग रहा था। किस्तें नहीं दे पाने पर बैंक वाले उसकी बाइक लेकर चले गए थे। मधुर के पैसे देने से मना करने पर प्रिंस ने उनकी हत्या कर दी। वह पिता के शव को ठिकाने लगा ही रहा था कि उसका छोटा भाई प्रशांत घर आ गया। उसने पिता को न देखकर संदेह होने पर पुलिस को सूचना दे दी।
पुलिस ने जांच के बाद आरोपी प्रिंस गुप्ता उर्फ संतोष को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। एक समय वह भी था, जब मधुर मुरली के पर बाबा घोपन बनिया शहर के सेठों में गिने जाते थे। कफन के कारोबार के साथ ही कई कारोबार थे। आज भी उस खानदान के लोग विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस दौर में मधुर मुरली कारोबार में घाटे की वजह से आर्थिक तंगी में आ गए। आज के हालात यह हैं कि मधुर मुरली को ही कफन मयस्सर नहीं हो रहा था।
आसपास के लोगों और किराएदारों ने आर्थिक सहयोग कर अंतिम संस्कार कराया। बुजुर्ग मां का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के मुताबिक, खानदानी बंटवारे के बाद जाफरा बाजार से मधुर मुरली के पिता सूर्य विहार आ गए थे। तब उन्होंने सीमेंट का कारोबारी शुरू किया, जो खूब चला भी, लेकिन बाद में मधुर मुरली हार्डवेयर की दुकान कर लिए और उनके भाई विजय अलग दुकान कर लिए हैं।
मधुर की दुकान नहीं चली जिससे वह आर्थिक रूप से कमजोर होते चले गए। दो बेटों में बड़े बेटे प्रिंस को भी उन्होंने दुकान करा दिया। बैंक से उसने कर्ज भी ले लिया, लेकिन दुकान नहीं चली। इस दौरान उसने बाइक भी कर्ज पर ले ली थी। कर्ज नहीं भर पाया तो बाइक को बैंक वाले खींच ले गए। प्रिंस ने ऑनलाइन फूड डिलेवरी का काम शुरू कर दिया। 2016 में उसकी शादी हुई और फिर एक बेटा हुआ। कर्ज का दबाव बढ़ने पर उसने पत्नी के सारे जेवर भी गिरवी रख दिए। अंत में होली से पहले पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई।
इसके बाद बाइक वापस पाने के लिए उसने पिता से 40 हजार रुपये की मांग शुरू कर दी। पिता के पास रुपये नहीं थे, वह असमर्थता जताए जिसका परिणाम शनिवार को उनकी हत्या के रूप में सामने आया। इस संबंध में पूर्व पार्षद अरविंद चौरसिया ने बताया कि मधुर मुरली काफी सम्मानित और अच्छे आदमी थे। घर की वर्तमान आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से आसपास के लोगों और किराएदारों ने आर्थिक सहयोग किया है। आगे भी परिवार के साथ हम लोग खड़े हैं।

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