17 वे आजमगढ़ रंग महोत्सव आरंगम का शुभारंभ
रचनात्मक स्वतन्त्रता के चलते कहानीकारों ने जाने अनजाने कृष्ण व राधा की प्रभुता के आगे उनकी मानवीय संवेदनाओं की उपेक्षा की। हमने जहां राधा से कृष्ण पर अपना अधिकार स्थापित करने की स्वतंत्रता छीन ली वहीं कृष्ण से भी राधा के प्रति उनकी मौन अभिलाषा का तिरस्कार किया। यह नाटक कृष्ण और राधा जैसे सांकेतिक चरित्र का प्रयोग कर कुछ अलग तरह से ही प्यार की दैवीय परिभाषा गढ़ता है। नाटक बताता है कि क्या होता है जब कृष्ण और राधा आखि़री बार मिलते हैं इस नश्वर संसार में ? नाटक प्रेम, इक्षा , इनकार, भक्ति आदि कि करुणामय कहानी है।
कृष्ण एवं राधा के मुख्य किरदार में डिंपी मिश्रा और हर्षिता मिश्रा ने तथा यशोदा के किरदार में स्वेता श्री वास्तव, युवा कृष्ण के में देवरात अनमोल , रूकमणी के में संस्कृति सिन्हा, अर्जुन के रूप में यश यादव आदि ने शानदार अभिनय किया। प्रकाश संयोजन अमित कुमार श्री वास्तव व मंच निर्माण सारांश भट्ट व सहयोग आकाश कुमार, यश, शिवम ने किया। म्यूजिक जय सिंह और कोरियोग्राफी हर्षिता मिश्रा ने संभाली। 23 मार्च सरदार भगत सिंह के शहादत दिवस पर प्रख्यात अभिनेता पियूष मिश्रा द्वारा रचित और श्रीनारायण पाण्डेय द्वारा निर्देशीत नाटक “गगन दमामा बाज्यो“ का प्रदर्शन हुआ। इसी नाटक पर पहले फिल्म “भगत सिंह - द लीजेंड“ बन चुकी है। इस कार्यक्रम में मुख्यअतिथि सामाजिक कार्यकर्ता दीनू जायसवाल और तल्हा रशादी प्रवक्ता उलेमा कौंसिल रहे। इस दौरान सूत्रधार संस्थान के अध्यक्ष डॉ सी के त्यागी, ममता पंडित, कंचन, शिखा, अरूण, विवेक पांडेय, हरिकेश मौर्य अखिलेश द्विवेदी आदि लोग उपस्थित रहे।
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