मधुबन/मऊ। आजादी के बाद लगातार कम्युनिस्टो, सपा, बसपा और कांग्रेस के चंगुल में कराहती रही 353 विधानसभा मधुबन में लगातार दूसरी बार बीजेपी ने अपना परचम लहराया है। हालांकि जीत का आंकड़ा इस बार पिछली बार से कम रहा लेकिन जीत तो जीत होती है। भाजपा की इस जीत से लोंगों में जबरदस्त खुशी का माहौल है।
नत्थूपुर के नाम से जानी जाती रही
बता दें आजादी के बाद यह सीट नत्थूपुर विधानसभा के नाम से जानी जाती थी। इस सीट पर रामसुंदर पांडेय ,मंगलदेव विशारद,राजकुमार राय,विष्णुदेव गुप्त, अमरेश चंद पांडेय,दो बार बसपा से उमेशचन्द पांडेय,एक बार गठबंधन से राजेन्द्र कुमार आदि लोगों ने विधान सभा पहुंचकर नत्थूपुर विधानसभा का नाम रोशन किया। उमेशचन्द पांडेय ने क्षेत्र के कटघरा शंकर में 32 केवीए का पावर प्लांट लगवाने का काम किया तो राजेन्द्र कुमार ने घोसी स्थित तहसील से सम्बंधित कार्य को मधुबन में अर्थात मधुबन को तहसील का दर्जा दिलवा दिया। जिससे लोगों को काफी सुविधा होने लगी।
पिछली बार रिकार्ड वोटों से दारा को मिली थी जीत
तहसील की दूरी सिमटकर शून्य से चालीस किलोमीटर तक रह गई। वर्ष 2012 में इसे विधानसभा मधुबन के नाम से बना दिया गया। जिसके प्रथम विधायक उमेशचन्द पांडेय विधायक बने। पहली बार 2017 मे भाजपा ने इस सीट पर ओबीसी कार्ड खेलकर पूर्व विधायक और सदन में विपक्ष के नेता दारा सिंह चौहान को चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले ही प्रत्याशी बनाया। लेकिन तब तक भाजपा के कार्यकर्ता पार्टी को मजबूत स्थिति में ला दिए थे। इसके अलावा लोगों का मोदी प्रेम इस कदर था कि दारा सिंह को मेहनत का सामना नहीं करना पड़ा। केवल मोदी नाम के सहारे वो चुनाव जीत गए। पिछले चुनाव में दारा सिंह चौहान को 86238 वोट मिले थे जो अब तक का रिकार्ड मत था।
मधुबन में जमकर हुई आतिशबाजी
इसी तरह कांग्रेस और सपा के गठबंधन प्रत्याशी रहे अमरेश चंद पांडेय को 56823 तथा बसपा से तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे उमेशचन्द पांडेय को 54803 वोट मिले थे। जो तीसरे नम्बर पर थे। यही कारण रहा कि सपा के पार्टी छोड़कर जाने के बाद भाजपा ने यहां से चौहान प्रत्याशी पर ही दांव आजमाया। जिस पर लोगों ने मोदी और योगी के नाम पर वोटों की बरसात करके उन्हें जबरदस्त जीत हासिल दिला कर लखनऊ की विधानसभा में भेज दिया। सपा दूसरे नम्बर तो बसपा प्रत्याशी तीसरे नम्बर पर रही। भाजपा के जीत के बाद मधुबन में जमकर आतिशबाजी की गई।
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