पूर्वांचल का समरस समाज भाजपा के ताबूत पर आखिरी कील ठोकेगा : जय प्रकाश पांडेय



गोरखपुर। पूर्वांचल में चुनाव प्रचार के क्रम में अपने गोरखपुर प्रवास में समाजवादी नेता लेखक एवं चिंतक जय प्रकाश पांडेय ने छठे चरण के मतदान की पूर्व संध्या पर तिवारी हाता पर संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि यह चुनाव महज सत्ता परिवर्तन की लोकतांत्रिक रस्मअदायगी भर नहीं है । उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 का यह ऐतिहासिक चुनाव राजनीति के अक्षांश- देशांतर को लांघ कर वैचारिक जमीन पर भी लड़ा जा रहा है। यह भारत की साझी संस्कृति के समरस समाज की साझी विरासत को सहेजते हुए आगे बढ़ाने वाले समाजवादियों और दूसरी ओर इस साझी विरासत को नफरत और विरोध के जहर से खंडित करने वाली सांप्रदायिक ताकत- भाजपा के बीच है। 

पांडेय ने यह भी कहा कि यह पूर्वांचल की जमीन कबीर, तथागत की सामाजिक न्याय के बैचारिक जागरण की साक्षी है ,तो सत्ता के अहंकार के खिलाफ चीतू पांडेय की बगावत की सरजमी भी है। आज भाजपा कारपोरेटपरस्त, सामंतवादी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश का किसान प्रतिदिन ₹37 आमदनी पर गुजारा कर रहा है। योगी राज ने जनता पर 40% कर्ज बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश के 1,77,00000 किसान परिवारों की स्थिति प्रवासी पक्षियों जैसी बना दी है जो प्रवास/पलायन के बिना अपना जीवन जी नहीं सकते।

जनरल ऑफ माइग्रेशन अफेयर 2020' के अनुसार उत्तर प्रदेश से 1,23,00000 लोग पलायन करके दूसरे राज्यों में गए। पोषण, शिक्षा , स्वास्थ्य आदि विकास के सभी पैमाने पर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान पर है। पूर्वांचल की प्रगतिशील सोच वाली जनता भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम छठे, सातवें चरण में वोट की हथौड़ी की ताकत से करेगी।

Post a Comment

0 Comments