तीन महीने दस दिन जेल में बंद रहा जीवा का हत्यारा, आजमगढ़ से क्या था कनेक्शन?


आजमगढ़। राजधानी लखनऊ स्थित कोर्ट में बुधवार को माफिया मुख्तार अंसारी के शूटर संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मार कर हत्या करने का आरोपी विजय यादव का आजमगढ़ से भी संबंध रहा है। उसके खिलाफ देवगांव कोतवाली में किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज था। इस मुकदमें में वह आजमगढ़ कारागार में लगभग तीन माह 10 दिन तक बंद रहा।

विजय यादव मूलरुप से जौनपुर जिले के केराकत कोतवाली अंतर्गत सर्की सुल्तानपुर गांव का निवासी है। लखनऊ कोर्ट में मुख्तार के के शूटर की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आ गया है। विजय यादव के खिलाफ जिले के देवगांव कोतवाली में नाबालिग को बहला-फुसला कर अपहृत कर लेने के बाद दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें उसे देवगांव कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर चालान कर दिया था। जेलर आरएन गौतम ने बतया कि जीवा के हत्यारोपी विजय यादव को दुष्कर्म के मामले में 17 अगस्त 2016 को दाखिल कराया गया था। वह आजमगढ़ जेल में लगभग तीन माह 10 दिन रहा और 27 नवंबर 2016 को मामले में सुलह आदि हो जाने के बाद जमानत मिल जाने पर रिहा कर दिया गया।

दरअसल, राजधानी लखनऊ के कोर्ट में बुधवार दोपहर अज्ञात बदमाशों ने गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर ने वकील की ड्रेस में थे और कोर्ट परिसर के बाहर वारदात को अंजाम दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। एक बच्ची भी घायल हो गयी है। संजीव उर्फ जीवा की पत्नी पायल महेश्वरी ने कुछ दिन पहले ही जताई थी हत्या की आशंका, सुरक्षा मांगी थी।पूर्व मंत्री, भाजपा विधायक रहते ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में जेल में था। संजीव जीवा की पत्नी और रालोद नेता पायल माहेश्वरी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। पायल ने कहा था कि पेशी के दौरान षड्यंत्र के तहत उनके पति की हत्या कराई जा सकती है। उन्होंने पति की सुरक्षा के लिए सीजेआई से उच्चाधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया था। 2017 में पायल महेश्वरी रालोद के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ी थी। कुख्यात संजीव के हत्यारे की पहचान विजय यादव पुत्र श्यामा यादव निवासी केराकत जिला जौनपुर के रूप में हुई है,पुलिस छानबीन में जुटी है।

उत्तर प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा जितना खेती-किसानी के लिए प्रख्यात है, उतना ही गैंगस्टर और अपराधियों के लिए कुख्यात रहा है। भाटी गैंग, बदन सिंह बद्दो, मुकीम काला गैंग और न जाने कितने अपराधियों के बीच संजीव माहेश्वरी का भी नाम जुर्म की दुनिया में पनपा। 90 के दशक में संजीव माहेश्वरी ने अपना खौफ पैदा शुरू किया, फिर धीरे-धीरे वह पुलिस व आम जनता के लिए सिर दर्द बनता चला गया। पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की इसलिए क्योंकि बीते दिनों शामली पुलिस ने उसी के गैंग के एक शख्स को एके-47,करीब 1300 कारतूस व तीन मैगजीन के साथ पकड़ा है। शामली पुलिस ने रास्ते में चेकिंग के दौरान अनिल नाम के शख्स को धर दबोचा था। दरअसल, जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। शुरुआती दिनों में वह एक दवाखाना संचालक के यहां कंपाउंडर के नौकरी करता था।

इसी नौकरी के दौरान जीवा ने अपने मालिक यानी दवाखाना संचालक को ही अगवा कर लिया था। इस घटना के बाद उसने 90 के दशक में कोलकाता के एक कारोबारी के बेटे का भी अपहरण किया और फिरौती दो करोड़ की मांगी थी। उस वक्त किसी से दो करोड़ की फिरौती की मांग होना भी अपने आप में बहुत बड़ी होती थी। इसके बाद जीवा हरिद्वार की नाजिम गैंग में घुसा और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ जुड़ा लेकिन उसके अंदर अपनी गैंग बनाने की तड़प थी। इसके बाद उसका नाम 10 फरवरी 1997 को हुई भाजपा के कद्दावर नेता ब्रम्ह दत्त द्विवेदी की हत्या में सामने आया। जिसमें बाद में संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। फिर जीवा थोड़े दिनों बाद मुन्ना बजरंगी गैंग में घुस गया और इसी क्रम में उसका संपर्क मुख्तार अंसारी से हुआ। कहते हैं कि मुख्तार को अत्याधुनिक हथियारों का शौक था तो जीवा के पास हथियारों को जुटाने के तिकड़मी नेटवर्क था।

इसी कारण उसे अंसारी का वरदहस्त भी प्राप्त हुआ और फिर संजीव जीवा का नाम कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी आया। हालांकि, कुछ सालों बाद मुख्तार और जीवा को साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड में कोर्ट ने बरी कर दिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका है, जबकि उसकी गैंग में 35 से ज्यादा सदस्य हैं। वहीं, संजीव पर जेल से भी गैंग ऑपरेट करने के आरोप लगते रहे हैं। जीवा पर साल 2017 में कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड में भी आरोप लगे थे, इसमें जांच के बाद अदालत ने जीवा समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि जीवा फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है, लेकिन साल 2021 में जीवा की पत्नी पायल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी (जीवा) जान को खतरा है। बता दें कि, पायल 2017 में आरएलडी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं और उन्हें हार मिली थी।

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