...तो क्या इस चुनाव में मुख्तार का किला भेद पाएगी भाजपा

मऊ सदर से पांच बार से विधायक है बाहुबली मुख्तार अंसारी



मऊ। जिले की सदर विधानसभा सीट प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का केंद्र बिंदु बना हुवा है, हो भी क्यों न इस सीट से बाहुबली मुख्तार अंसारी पांच बार से विधायक हैं। अभी मुख्तार कई संगीन आपराधिक मुकदमों में आरोपी है और जेल में बंद है। मजे की बात यह है कि मुख्तार अंसारी मात्र एक बार जेल से बाहर रहकर चुनाव लड़ पाये है, बाकी चार बार जेल में रहकर ही मुख्तार अंसारी ने इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा है। इस बार यह सीट इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है कि पूरे पांच वर्ष तक मुख्तार अंसारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रडार पर रहे, जब से भाजपा सरकार बनी है तब से मुख्तार अंसारी से जुड़े लोगों पर जनपद में अनेकों बार बाबा का बुलडोजर गरजता देखा गया।

बसपा ने भीम राजभर को बनाया प्रत्याशी

सूत्रों की माने तो मुख्तार अंसारी इस बार ओमप्रकाश राजभर की पार्टी व सपा गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरेंगे। इस बार अंसारी मुस्लिम, यादव व राजभर मतों के भरोसे बैतरणी पार करने की जुगत में लगे हैं। हालांकि बसपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को सदर सीट से प्रत्याशी बनाया है। इस समय सभी पार्टियां राजभर मतों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं लेकिन यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि राजभर मतदाता किस करवट बैठता है।

भाजपा मे टिकट के लिए कई दावेदार

सत्तारूढ़ दल भाजपा की बात की जाए तो यहां टिकट मांगने वालों की लाइन लगी है जिसमें प्रमुख रुप से अरिजीत सिंह, अशोक सिंह, बजरंगी सिंह बज्जू, शक्ति सिंह, विजय प्रताप सिंह, सीता राय, प्रवीण गुप्ता, त्रिवेणी प्रसाद वर्मा, विजय राजभर, राजीव जौहरी कमल निशान से मैदान में उतरने को बेताब हैं। अरिजीत सिंह की बात की जाए तो उनके बारे में यह कहा जा सकता है कि वह जन्म से ही भाजपाई हैं, श्री सिंह प्रोफेसर रामजी सिंह के पुत्र हैं जिस समय भाजपा दुर्दिन मे थी उस वक्त जिले में प्रोफेसर साहब भाजपा का झंडा बुलंद करने का काम करते थे, अरिजीत सिंह सदर सीट से भाजपा के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। अशोक सिंह मुख्तार अंसारी के धुर विरोधियों में माने जाते हैं और खुले मंचों से मुख्तार को चौलेंज करने वालों में इनका नाम शुमार है, यह भी भाजपा सदर सीट से मजबूत दावेदारों में से एक है। बजरंगी सिंह बज्जू लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रह चुके हैं। वही शक्ति सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष व कार्यवाहक अध्यक्ष रहे है, अपनी युवा टीम के भरोसे टिकट की जुगत में लगे हैं। सीता राय जनपद की शिल्पी कल्पनाथ राय की बहू हैं और टिकट की प्रमुख दावेदार है। त्रिवेणी प्रसाद वर्मा भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, इन्होंने तो पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस करके लोगों को यह बताया कि हमारा टिकट तो लगभग कंफर्म ही है।

मुश्किल है मुख्तार का किला भेदना

विजय राजभर घोसी से विधायक हैं और टिकट के मजबूत दावेदार हैं लेकिन लोगों का कहना है कि विधायक जी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि घोसी से लड़ना ठीक होगा या सदर से। टिकट की लाइन में राजीव जौहरी स्वर्णकार समाज व पिछड़ी वोटों के सहारे अपनी दावेदारी मजबूत बताने में लगे हैं। अंदर खाने से खबर है कि सदर सीट पर भाजपा कई खेमों में बटी दिख रही है कई बार यह रार सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली है, ऐसी स्थिति में तो मुख्तार का किला भेदना मुश्किल ही लग रहा है, लेकिन ऐसा कहना अभी जल्दबाजी हो जाएगी क्योंकि भाजपा ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है।

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