ताजा सर्वे में बसपा का 12 प्रतिशत वोट शेयर होगा कम-जाने किसे मिलेगा हाथी की सुस्ती का फायदा



लखनऊ। 18वीं विधान सभा के चुनाव में एक चीज जिसने सबको हैरान किया है, वह है बहुजन समाज पार्टी और इसकी सुप्रीमो मायावती की निष्क्रियता। चार बार प्रदेश की कमान संभाल चुकीं मायावती अभी तक मैदान में नहीं उतरी हैं तो उनके दल की गतिविधियां भी भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की तुलना में काफी कम दिख रही हैं। ऐसे में राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि पिछले दो चुनावों में बसपा के खराब प्रदर्शन और इस चुनाव में हाथी की सुस्ती की वजह से पार्टी के समर्थक नया ठिकाना तलाश सकते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मायावती का यह घाटा किसके लिए तारन हार बन सकता है?

जी न्यूज डिजाइन बॉक्स्ड की ओर से किए गए ताजा ओपिनियन पोल कि माने तो बसपा को पिछले चुनाव के मुकाबले 12 फीसदी वोट शेयर का नुकसान झेलना पड़ सकता है। 11 लाख लोगों की राय पर सामने आए नतीजों के मुताबिक, बसपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में 22 फीसदी वोट मिले थे, लेकिन इस बार पार्टी को 10 फीसदी वोट शेयर से ही संतोष करना पड़ सकता है। इस लिहाज से पार्टी को 12 फीसदी वोट का नुकसान हो रहा है।

तो किसे हो सकता फायदा

यह सीधे तौर पर तो नहीं कहा जा सकता कि बसपा से शिफ्ट होने वाले कितने वोटर किस पार्टी की ओर जाएंगे, लेकिन ओपिनियन पोल के मुताबिक दूसरी पार्टियों को जो वोटशेयर मिल रहे हैं, उनसे कुछ संकेत जरूर मिलते हैं। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी को इस साल 41 फीसदी वोट शेयर मिल सकता है, जबकि पार्टी को 2017 के चुनाव में 40 फीसदी वोट मिले थे। इस लिहाज से बीजेपी को 1 फीसदी अधिक वोट मिल रहा है। वहीं, 2017 में 22 फीसदी वोट लेने वाली सपा की हिस्सेदारी में बड़ा इजाफा होता दिख रहा है। सपा के खाते में इस बार 34 फीसदी वोट आ सकते हैं, यानी 12 फीसदी की वृद्धि। कांग्रेस की बात करें तो 2017 की तरह ही देश की सबसे पुरानी पार्टी के हाथ एक बार फिर 6 फीसदी वोट आएंगे। अन्य के खाते में 10 फीसदी के मुकाबले 9 फीसदी वोट आ सकते हैं।

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